अध्याय 144

वे एक तरह के गतिरोध में फँस गए थे—इंडिगो के हाथ में बिज़नेस कार्ड था, जो अब भी अटपटा-सा हवा में ही रुका हुआ था।

उसके चेहरे की वह रहस्यमयी मुस्कान पल भर में गायब हो गई। कुछ सेकंड बाद उसने धीरे-धीरे कार्ड वापस खींच लिया।

उसकी उँगलियाँ कार्ड के किनारे से छूकर गुज़रीं। आँखों में जो सराहना और खिलंदड़ाप...

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